अनुत्तरित कविताएँ

1)

मैंने तस्वीरें नहीं खींची
दृश्यों को आँखों में जीवित रखा।
उन्हें अश्रुओं से नमी और नमक मिला
आज वे नमक का कर्ज चुकाते हैं
मेरे सपनो में रोज वे लहलहाते हैं।

2)

वो तमाम बातें
जो मै तुमसे कहना चाहता हूँ
कविताओं मे लिखता हूँ
कविताएँ अपने गंतव्य को चलती है
रास्ते में कई बार,
शब्दो के अर्थ बदल जाते है
या शब्द अर्थ खो देते हैं
और कविताएँ अनुत्तरित रह जाती हैं।


Finally, 2020 ended. This year will be long remembered for the Covid-19 pandemic. The death and destruction brought by this pandemic are unimaginable.

On the professional front, this year was good for me. 28th December was the last working day for me with my previous organization. For submitting the laptop and all other last day formalities I visited Mumbai.

My last visit to the previous organization’s office

I am an emotional person but contrary to my expectation, I wasn’t emotional on my last day. It’s probably due to the fact that we all are working remotely from 8–9 months because of the pandemic. Probably absence of people, whom…


Some thoughts on my behaviour in recent weeks

Sometime in life, we should take a pause and take a look back at our behaviour.

My behaviour in the past few weeks to a person whom I probably respect and love most is despicable. I didn’t want to become this type of person. I never wanted to be a person with whom people are uncomfortable.

I wish I had delete button so I could delete these few weeks from my life.

I promise that it will never happen again. Never Again!


मेरे नाना श्री रामचंद्र त्रिपाठी जी

किसी प्रियजन की मृत्यु के बारे मे लिखना बहुत ही कठिन है। यह चीज और भी कठिन हो जाती है, जब आप जिनके बारे में लिखने जा रहे वो आपके नाना हो।

25 जून 2020 की तारीख थी, मै amazon prime पर कोई सीरीज देख रहा था, तभी मौसी का फोन आया की नाना जी नही रहे। मै तो उस समय बिल्कुल किंकर्तव्यवमूढ हो गया।

मृत्यु के कुछ दिन पहले नाना से बात हुई थी तब वो मिलने आने को कह रहे थे। पूरे covid lockdown मे वो लगभग रोज ही फोन करते रहते थे, कि वर्क फ्रॉम होम कैसा…


ग्लानि

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1.

“मुझे तुमसे प्रेम है"
होंठो पर अटके इन शब्दों को
किसी उद्धारक की तलाश है।

2.

प्रेम दूरियां घटा देता है
और कविताएँ भी।
मेरी कविताओं में तुम दूर रह के भी
कितने पास हो
ऐसा लगता है, तुम्हारा जाना
अभी कल की बात हो

3.

वो सारे गंवाए गए क्षण
जिनमें हम साथ हो सकते थे
जिंदगी की सबसे बड़ी हानि है।
गंवाए क्षणों के बारे में सोचना
सबसे बड़ी ग्लानि ।


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1.शब्द

मेरे शब्द अंदर ही अंदर घुटते हैं
मै अपने शब्दों के दुर्भाग्य पर रोता हूँ
वो कभी अपने इंगित जगह नहीं पहुंचे
पिछले जन्म में वो ऐसे बादल रहे होंगे
जो कभी नहीं बरसे

2.तुम

वो सारी चीजें,

जो तुम्हारी याद दिलाती हैं,

पवित्र हैं।

मुस्कुराहट संक्रामक होती है,
तुम्हारी संगति से मैं भी मुस्कुराता जाता हूँ

तुम्हारी बातें, दिल को ऐसे छूती हैं
जैसे नर्म घास पर ओस बिखर जाती है।


वर्तमान हिंदी कवियों में मुझे गीत चतुर्वेदी बेहद ही पसंद है। उनकी कुछ कविताएँ कविता-कोश पर पढ़ने को मिली, जिससे प्रभावित होकर मैंने उनकी पुस्तक, ‘न्यूनतम मैं' को मंगाया। उस पुस्तक को पढ़ने के बाद, मैं गीत चतुर्वेदी का मुरीद हो गया। उनकी कविताएँ अंतर्मन को छूती हैं। उनकी कविताओं में सूक्ष्म संवेदनाओं की अभिव्यक्ति इतनी सफल तरीके से होती है कि पाठक उस कविता का एक अभिन्न अंग बन जाता है। नीचे मैंने उनकी कुछ पंक्तियाँ संकलित की हैं, जिसमें से ज्यादातर ‘न्यूनतम मैं' से है। आप लोग भी पढ़कर आनंद उठाइये।

१. प्रेम इस तरह किया जाये

कि…


जब तुम पास होती हो

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जब तुम पास होती हो
तो मन की गांठे खुलने लगती हैं,
तमाम उलझनें
परत दर परत
दबी हुईं बातें
मुँह से स्वतः ही निकलने लगती हैं।
ऐसी कल्पनाएं
जो सिर्फ कल्पनाओं में सच हो सकती हैं
उनमे डूब जाता हूँ
मै उस परिदृश्य में कहीं नहीं हूँ
कल्पनाओं में उसका हिस्सा बनता हूँ
फिर तुमसे बिछड़ता हूँ
सिसकता हूँ।
मानसिक संवाद की ये श्रृंखला
तुम्हारी अनुपस्थिति में भी ऐसे ही चलती रहती है
अहसासों की दुनिया भी कितनी अजीब होती है।


( हाइकु मूलतः जापानी शैली है, जिसमें 17 अक्षर होते हैं। ये कविता तीन पंक्तियों में लिखी जाती है, जिसके प्रथम पंक्ति में 5 अक्षर, दूसरी में 7 अक्षर और तीसरी पंक्ति मे 5 अक्षर होते हैं।)

(१)

निष्ठुर तुम

है सूनी डगरिया

व्याकुल हम।

(२)

जाम ही जाम

शहरों की जिंदगी

काम ही काम ।

(३)

गुजरों कभी

ज़रा गांवों से होके

राम ही राम।

(४)

टूटी निंदिया

धरा पर उतरे

टूटे सपने।

(५)

नानी के बिना

रिक्त है, अपूर्ण है

नानी का घर।


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India is really a unique nation with a lot of diversity, with so many languages, cuisines, and dances. This list is endless. One can include the diversity of cultural practices followed by majority Hindus in the list. But there is another aspect of the Indian way of life. Indians are obsessed with fair skin. Although this is bit ironic, given the fact that there are so many dark-skinned gods and goddesses in Indian culture.

Being a person, with a dark complexion, I have experienced this obsession on a day-to-day basis. Jokes about dark complexion are so common. I can recall…

Raghvendra Pandey

Interested In Poetry, Politics, History, Religion, Philosophy, Statistics and Data Science.

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